
24 नवम्बर से 22 दिसम्बर तक मार्ग शीर्ष रहेगा तो वृषभ राशि वाले जातकों के लिए कहा कहता है राशिफल। श्रीमद् भगवत गीता के बारे में गार्ग शीर्ष माह में बड़े सुन्दर से वर्णन किया गया है। दसवें अध्याय में जब अर्जुन अपने कौतुहल श्रीकृष्ण के सामने रखते हैं और पूछते हैं कि आपके किस स्वरूप का मैं लगातार चिंतन करूं। किस तरह से आपके बारे में मैं सोचूं और आपको हृदयस्थ करने के बारे में मेरा मन लगातार अग्रसर होता चला जाए। तो श्रीकृष्ण उस अद्भुत स्वरूप का वर्णन करने लगते हैं। वो कहते हैं कि इन्द्रियों में मैं मन हूं और इसके साथ में विद्याओं में जहां आध्यात्म विद्या और छंदों में गायत्री। वहीं मैं मासों में मार्ग शीर्ष मास हूं। तो यहां यह जानकारी लेना अतिआवश्यक था। उसी मार्ग शीर्ष मास की हम चर्चा करने जा रहे हैं। कार्तिक मास त्योहारी महीना जिसमें दीपावली भी आती है, वो महीना पूर्ण हुआ उसके बाद में मार्ग शीर्ष मास हम सभी के समक्ष अब आने वाला है। जीवन में किस तरह के फलाफल लेकर आएगा इसकी समग्र चर्चा कर लेना हमारे लिए अतिआवश्यक होता है। दर्शकों! यहां एक बात मैं और करूं कि जीवन लगातार चलता हुआ एक इवोल्यूशन प्रोसेस है। आप सभी की ओर से मुझे हिदायत मिली कि आप हिन्दी का प्रयोग थोड़ा सा कम करें इसके साथ में जो कम्युनिकेशन की लेंग्वेज है उसके साथ में आएं। मैं इस इवोल्यूशन प्रोसेस के साथ में लगातार अग्रसर हूं। आपकी हिदायत को मान रहा हूं। इट विल हैपन काइंड ऑफ इवोल्यूशन प्रोसेस। शार्टली इसकी ओर आगे बढ़ते रहेंगे, प्रयत्नशील रहेंगे। उसी तरह जो यहां फलाफल प्रतिबिम्बित होते हैं जीवन में। देखिये, गोचरीय व्यवस्थाएं एक माध्यम है और हम मूनशाइन के माध्यम से चर्चा करते हैं। मूनशाइन अलग है। सनशाइन अलग है। इसके साथ में जब हम दशाओं की बात करते हैं, लग्न की बात करते हैं, नवमांश की बात करते हैं। ये सारे अलग-अलग अंग हैं। यहां मैं गोचरीय व्यवस्थाओं की चर्चा करता हूं। महीने भर की राशिफल के साथ में वो रहता है मूनशाइन के माध्यम से। आपका मूनशाइन कौनसा है। चन्द्र राशि कौन सी है उसके माध्यम से ही हम सारी की सारी चर्चाएं यहां करते हैं। वृषभ राशि वाले जातकों के लिए बात और चन्द्रमा राशि स्थान में ही। याद रखिये सिम्बोलिक एप्रोच के साथ में। ये अपनी पोजीशन्स को लगातार परिवर्तित करते रहते हैं चन्द्रमा। लेकिन हमारे लिए संभव नहीं हो पाता कि उन पोजीशन्स को लगातार परिवर्तित करके आपके समक्ष लेकर आ पाएं। इसलिए राशि स्थान में ही इन्हें प्रतीकात्मक तौर पर हम दर्शाते हैं। इसके साथ में सोलह नवम्बर को सूर्य अपनी संक्रांति को परिवर्तित कर चुके हैं और इसके बाद में वृश्चिक में प्रवेश कर चुके हैं। शुक्र 16 नवम्बर को ही मार्गी होकर पहले वक्री थे। वक्री के साथ में अस्तगत स्थितियों में भी थे 31 अक्टूबर को उसे निकले और उसके बाद में 16 नवम्बर को मार्गी हो गए। अब खुद नैसर्गिक स्थितियों के साथ में अकेले विराजित हैं। सूर्य ने यही क्रमबद्ध तरीके के साथ में चीजों को प्रभावित करने का काम किया। ग्रहों को एक तरह से प्रभावित करने का कार्य किया। सर्वप्रथम यहां शुक्र को अस्तगत स्थितियों के अंदर लेकर आए और उसके बाद में अभी गुरु 7 दिसम्बर तक अस्तगत स्थितियों के अंदर हैं। इसके बाद में यदि बात की जाए तो जब हम 22 दिसम्बर तक की बात करते हैं तो इस अंतराल के कुछ दिनों के लिए शनि भी अस्तगत स्थितियों में आ जाएंगे। जो कि 18 जनवरी तक सूर्य के प्रभाव क्षेत्र, आवरणीय क्षेत्र में आ जाने की वजह से अस्तगत स्थितियों के अंदर रहेंगे। सूर्य और शनि की युति जब भी आती है तो पिता और पुत्र के अंदर थोड़े से न्यूनाधिक वैचारिक मतभेद लेकर सामने आती है। यदि कुंडली में भी लग्न कुंडली में भी यही स्थितियां बन रही हैं तो कांट्राडिक्शन वाली पोजीशन को अवर्ट करने के लिए हमें जरूर जाना चाहिए। बुध यहां विराजित है, जो कि वक्री होंगे और 6 दिसम्बर तक वक्री स्थितियों के अंदर ही रहेंगे। गुरु अस्तगत जैसा कि मैंने आपको बताया शनि धनु राशि में विराजित, राहू और केतु की बात की जाए तो कर्क और मकर में विराजित। मंगल की जब हम चर्चा करते हैं तो मंगल यहां कर्म स्थान के अंदर उच्चस्थ स्थितियों से निकलकर अब कर्म स्थान के अंदर आ गए हैं। कुंभो भोम हो चुके हैं। मंगल शनि की राशि के अंदर आ चुके हैं और शनि तीसरी दृष्टि से मंगल को देखने का भी कार्य कर रहे हैं। तो सारे के सारे जीवन के क्षेत्रों में किस तरह का प्रभाव रहेगा। आइये हम इसकी चर्चा करते हैं। सर्वप्रथम यदि एज्यूकेशन की बात की जाए, यदि आप एज्यूकेशनल इंस्टीट्यूट से जुड़े हुए हैं, खुद उसे रन कर रहे हैं। या फिर किसी एज्यूकेशनल इंस्टीट्यूट के अंदर अपनी स्टडी को कम्पलीट करने की ओर जा रहे हैं। अभी जैसा कि कैट वगैरह के एक्जाम भी रहते हैं। मैनेजमेंट स्कूल के एक्जाम भी रहते हैं। ये पोजीशन ठीक बन रही है। उसके पीछे रीजन ये है कि यहां कारकाधिपति पंचम स्थान के कारकाधिपति सप्तम स्थान के अंदर और यहां पंचमेश होकर बुध भले ही वक्री होंगे लेकिन यहां सप्तम स्थान के अंदर गुरु के साथ में ही विराजित रहेंगे। सूर्य भी पहले से यहीं विराजित। देखिये बुध भी स्थगत स्थितियों के अंदर आएंगे। लेकिन जब सूर्य और बुध लगभग साथ में ही अपने अंतराल को परिवर्तित करते हैं और सूर्य बुध का बुद्धादित्य योग ज्यादातर कुंडलियों के अंदर देखा जाता है तो बुध एक तरह से पारे के रूप में कार्य करता है। जो कि स्त्री कारक गुणों को अपनाकर रखते हैं। और इसके साथ में पुरुष कारक गुणों को भी अपनाकर रखते हैं तो अस्तगत स्थितियों का प्रभाव बुध के ऊपर इतना नहीं रहता। सिर्फ हम सांकेतिक तौर पर इस बात की विवेचन जरूर करते हैं तो पंचमेश होकर यहां के कारकाधिपति और इसके साथ में इस भाव के अधिपति दोनों सप्तम स्थान के अंदर आ गए और सूर्य जैसे प्रखर ग्रह के साथ मंगल की राशि के अंदर आ गए बुध को यहां मंगल की राशि में इतना अच्छा नहीं माना गया है। लेकिन जो पोजीशनिंग इन्होंने ली है वो शिक्षा के हिसाब से बड़ी ही बेहतरीन है। यदि आप टेक्नीकल एज्यूकेशन का कोई भी एक्जाम देने जा रहे हैं तो शनि और मंगल की भी स्थिति बड़ी बढिय़ा बन रही है। भले ही शनि तीसरी दृष्टि से देखकर कार्य में दृढ़ता देने का कार्य करे जिसे हम कई बार विलंब की पोजीशन भी कह देते हैं। इसके साथ में शनि जब भी तीसरी दृष्टि से मंगल को देखेंगे तो टेक्नीकली व्यक्ति को साउंड करने का कार्य करेंगे। यदि टेक्नीकली कोई भी पोजीशन अटकी हुई है आप उसके लिए बड़े ही बेहतरीन तरीके से फिर से प्रयासरत रहिये। आपको रिजल्ट निश्चित तौर पर बड़े ही अच्छे से मिलेंगे। मंगल भाग्य स्थान से निकले भले ही उच्चस्थ स्थितियों के अंदर थे लेकिन अब कर्म स्थान के अंदर आ गए हैं। ये पोजीशन बहुत ही बढिय़ा। इसके साथ में सूर्य जो कि सुख स्थान के अधिपति होते हैं वो भी तृतीय केन्द्र के अंदर आ गए हैं। ये पोजीशन भी काफी हद तक अच्छी। और एक त्रिकोण के अधिपति बुध होकर भी सप्तम स्थान के अंदर आ गए हैं। शिक्षा के हिसाब से इस पोजीशन को अच्छा कहा जा सकता है। यदि आप टेक्नीकल एप्रोच के साथ में है और कोई भी काम्पीटिटिव एक्जाम, विशेषकर मैनेजमेंट का कोई भी एक्जाम देने जा रहे हैं। काफी हद तक बेनिफिट होने की आपको संभावनाएं हैं। व्यापार के इतर यदि एज्यूकेशन की ही बात की जाए तो लाभेश भी सप्तम स्थान के अंदर आ गए हैं। गुरु यहां लाभेश होते हैं और सप्तम स्थान के अंदर मंगल की राशि के अंदर आ गए हैं। भले ही 7 दिसम्बर तक अस्तगत हैं। लेकिन अपनी नैसर्गिक स्थितियां बिलकुल भी नहीं छोड़ते जो खुद की इंटरसिक क्वालिटीज है उसकी एप्रोच के साथ जरूर चलते हैं। राशि स्थान को देख कर उसे और प्रखर करने का कार्य कर रहे हैं। तो ये तो रही एज्यूकेशन के क्षेत्र की बात। अब यदि हम व्यापार की बात करें। आप एक्जस्टिंग बिजनेश या फिर न्यू बिजनस की तरफ जाना चाहते हैं। इफ वांट स्टेबलटिस दैट गुड टाइम फोर यू। उसके पीछे रीजन है कि लाभ स्थान। लग्न के अधिपति होकर सप्तम के अंदर आ गए हैं गुरु। यदि सप्तमेश होकर गुरु लाभ स्थान के अंदर या कोई भी ग्रह लाभ स्थान के अंदर जाता है और यदि लग्न कुंडली में ये स्थितियां बनती हैं तो उच्च कोटि के व्यापारिक लक्षणों को रिफलेक्स करने का कार्य करता है। और जब लाभेश भी व्यापार स्थान के अंदर आ जाएं तब उस पोजीशन में रिजल्ट नहीं देते। लेकिन व्यापार में लगातार बढ़ोतरी के संभावनाएं बनी रहती हैं। और लाभ जो कि बनना चाहिए व्यापार से। वो निरन्तर बनता चला जाता है। और कॉमर्स फील्ड के अधिपति बुध साथ में विराजित हैं तो बिलकुल सही केलकुलेट के साथ आपको आगे बढ़ाने का कार्य करेंगे। लिक्विडिटि हाउस के अधिपति होकर भले ही 6-8 का संबंध बनाते हों, लेकिन पोजीशन बड़ी ही स्ट्रांग पकड़ रखी है बुध ने। इस वजह से आप बड़े ही अच्छे रिजल्ट्स की उम्मीद कर सकते हैं। और साथ में जो पारिवारिक कलह आदि चल सकती है उनमें भी एक तरह से विराम लगेगा। क्योंकि बुध वक्री हो जाएंगे तकरीबन 15 दिनों के लिए। तो ये स्थिति भी काफी अच्छी कुछ हद तक कही जा सकती है। तो जुबान के साथ में ये सारी की सारी स्थितियां कुटुम्ब के माध्यम से और लिक्विडिटि के माध्यम से भी काफी हद तक अच्छी है। चन्द्रमा अपनी पोजीशन्स को लगातार चेंज करते रहेंगे। लेकिन चन्द्रमा की राशि में विराजित हैं राहू। ये हलकी फुलकी अघात स्थितियों के अंदर व्यक्ति को कई बार लेकर जाते हैं। लेकिन आप देखेंगे कि गुरु ने एक कंट्रोल्ड एप्रोच अपनी अमृतमयी दृष्टि से यहां पर निक्षेपित कर रखी है। यानि कि नवीं दृष्टि से गुरु पराक्रम स्थान को और राहू को देखने का कार्य कर रहे हैं। करने वाली रिजल्ट्स कई बार निरर्थक पराक्रम। जिसकी एग्रीवनेस की आवश्यकता ही नहीं है वो कई बार जब सामने निकल कर आती है तो हमें हानि देने का कार्य करती है। लेकिन गुरु ने उसे कंट्रोल करने का कार्य किया। पराक्रम को कंट्रोल करने का कार्य किया। जहां आवश्यकता है वहीं हम पराक्रम के माध्यम से आगे चलेंगे नहीं तो बड़ी ही शांति के साथ में आगे बढ़ते चले जाएंगे। तो बिजनस के हिसाब से अगर आप एक्सपांसन करना चाहते हैं और यदि एक स्पेशिफिक टाइम पीरियड का और ध्यान रखा जाए। 7 दिसम्बर से 22 दिसम्बर तक का जो समय है इसकी यदि हम बात करें तो एक अच्छा समय हम वृषभ राशि के जातकों के लिए पाते हैं। खुद भी वृषभ राशि का जातक हूं और यहां सारी की सारी चर्चाओं के माध्यम से आपके समक्ष ये सारी जानकारियां हम रखते चले जाते हैं। ये पोजीशन काफी हद तक एक ट्रीवन एप्रोच लिए हुए। अब यदि राशि स्थान की बात करें तो राशि के अधिपति होकर इसके साथ में षष्ट स्थान के अधिपति होकर शुक्र षष्ट स्थान के अंदर ही विराजित। ऐसे सौम्य ग्रह, ऐसे स्त्री कारक सौम्य ग्रह जब षष्ट स्थान के अंदर आकर बैठते हैं भोग विलास की जो प्रवृति है उसको इतना अच्छे से आगे बढ़ते हुए नहीं देखता व्यक्ति। हालांकि खुद की सातवीं दृष्टि से व्यय स्थान को जरूर देखेंगे। तो व्यय के अंदर व्यक्ति नियंत्रण नहीं रख पाएगा। व्यय के साथ में लगातार वो आगे जरूर बढ़ेगा। एक्सपेंसेज पर कोशिश कीजिये कि थोड़ा सा नियंत्रण रहे। क्योंकि गुरु इस हाउस को देखने का कार्य नहीं कर रहे। जहां मेश राषि वालों के लिए कंट्रोल्ड में थी। गुरु इस पोजीशन को कंट्रोल करने का कार्य नहीं कर रहे हैं। यदि थोड़े से अल्कोहलिक एप्रोच साथ में है, या फिर किसी व्यसन के साथ में है और आप उसे मुक्त होना चाहते हैं तो 7 दिसम्बर के बाद का समय और उसके बाद में जब शनि अस्तगत स्थितियों के अंदर रहेंगे तो आप उसके लिए जरूर जाएं। उस समय यदि आप कोशिश करेंगे तो काफी हद तक रिलीफ मिलने की संभावनाएं भी रहती हैं। क्योंकि व्यसन से जब व्यक्ति मुक्त हो पाता है तो पूर्ण रूप से स्वतंत्र जीवन जी पाता है। व्यसन भी एक तरीके की परतंत्रता है। यदि हम सुबह समय पर नहीं उठ पाए तो हम नींद के साथ में परतंत्र है। और यही पोजीशन यदि हम व्यसन के साथ में है। कोई भी ट्रिवन एप्रोच के साथ में, नेगेटिव ट्रिवन एप्रोच के साथ में चल रहे हैं वो भी हमारे जीवन की एक तरह से परतंत्रता ही कही जा सकती है। तो जब ये अस्तगत स्थितियों के अंदर आएं और सूर्य साथ में हो क्योंकि 16 दिसम्बर को सूर्य शनि के साथ में विराजित हो जाएंगे और 18 से इन्हें अस्तगत। 16 से ही इन्हें अस्तगत स्थितियों के अंदर लाने का कार्य करेंगे। तो उस समय आप किसी भी नशे से मुक्त होना चाहते हैं। ये समय आपके लिए काफी हद तक बेटर है। ये एक नई बात मैं इन सारी की सारी स्थितियों के अंदर जोड़ रहा हूं आप देखियेगा फलाफल के अंदर जरूर आपको वृद्धि होती हुई प्रतीत होगी। और इसके साथ में इन चीजों को छोडऩे के लिए जिस विल पॉवर की आवश्यकता होती है। मंगल उस विल पॉवर को बढ़ाने में कहीं न कहीं सहयोगी भी साबित होंगे। क्योंकि कर्म स्थान में इसके साथ में ये कर्म स्थान के साथ-साथ प्रबंधन के हाउस में भी विराजित हैं और सुख स्थान को भी देख रहे हैं तो इस एप्रोच में एक बेनिफिट देंगे और सुख स्थान के अधिपति होकर सूर्य खुद यहां सप्तम स्थान के अंदर है। तो आप उस पोजीशन के अंदर आप जाएंगे तो हो सकता है कि उससे आजादी मिल पाए और एक नेराश्रय वाली स्थिति पर फर्क पाएं। क्योंकि भोग कारक शुक्र भी। ये सारी की सारी भोगविलासिता की स्थितियां हैं। तो भोगकारक शुक्र भी उससे मुक्ति की ओर आपको लगातार अग्रसर करेंगे। और वहां जीवन पूर्ण रूप से स्वतंत्रता के साथ में आगे बढ़ पाएगा। तो ये रही व्यापार की बात। अब इसके साथ-साथ कई बार जब हम अफेयर्स की हम बात करते हैं तो आपने देखा होगा कि अफेयर्स एक रिवोल्यूशन के साथ व्यक्ति को आगे लेकर चले जाते हैं। हम देखते हैं कि किसी व्यक्ति की जिंदगी में एक लड़की आई है या लड़का आया तो उसका पूरा जीवन परिवर्तित करके रख दिया। या तो नेगेटिव एप्रोच के अंदर या पूरे तरीके से पोजीटिव एप्रोच के अंदर। यहां बुध पंचमेश होकर सप्तम स्थान के अंदर आ रहे हैं। यदि हम इस रिलेशन की केलकुलेशन के अंदर बड़े ही अच्छे से ध्यान रखते हैं तो ये रिलेशन हमें काफी हद तक कई चीजें सीखा सकता है। सिर्फ और सिर्फ फैशिनेशन नहीं। देखिये, रिलेशन के अंदर यूथ कोशिश ये करता है कि जब एक बार हासिल हो गया तो उसके बाद में जिंदगी का लक्ष्य क्या। जिंदगी के लक्ष्य बहुत ऊंचे होने चाहिए। हम अफेयर्स के अंदर किसी भी चीज को हासिल कर ले और उसके बाद में ठहराव वाली पोजीशन आ जाए तो वहां किसी भी चीज का एक तरह से पूर्णरूप से आंसर नहीं मिला है। हमें लगातार आगे बढऩा चाहिए उस रिलेशन के साथ में भी कि हम कितना सीख पाए हैं। कितनी डवलप एप्रोच के अंदर आ पाए हैं। कितना निखर पाए हैं वक्त के व्यवहार के साथ में भी। अपनी फैशिनेशन्स के ऊपर कितना हम रख पाए हैं क्योंकि फैशिनेशन्स तो बढ़ेंगे ही बढ़ेंगे इसके साथ में यहां सप्तम स्थान के अंदर बैठकर बुध उस पोजीशन के अंदर कहीं न कहीं केलकुलेशन देने का कार्य करेंगे। इंटरो स्पेकन देने का कार्य करेंगे कि हमें आगे बढऩा चाहिए या नहीं। अगर बढऩा है तो कैसे बढऩा है उसकी भी एक तरह से पूरी की पूरी फितरत जमा जोड़ हमारे सामने लेकर आएंगे। सुख स्थान के अधिपति सप्तम के अंदर बैठ गए। व्यापार से ही लगातार सुख मिलने की उम्मीद है। क्योंकि ये पोजीशन भी आप देख रहे हैं साथ में एकादश की भी पोजीशन सप्तम के अंदर देख रहे हैं। तो सुखों की अनुभूति जरूर होगी लेकिन ये सारी की सारी स्थितियां हमारे सामने पोजीशन्स लेकर आएगी। चतुर्थ, अष्टम और द्वादश जब चन्द्रमा आएंगे तो विशेष तौर पर अभी मौसम परिवर्तित हो रहा है। वृषभ राशि के जातकों को ध्यान रखे की आवश्यकता है। भोग विलास के प्रति ये राशि बहुत अधिक आसक्त रहती है। लेकिन जब शुक्र भले ही अपने नैसर्गिक स्थितियों के अंदर हों लेकिन षष्ट स्थान के अंदर हो तो व्यक्ति एक छटपटाहट पाता है। उसकी तरफ से आप ध्यान हटाइये। योगाभ्यास आदि की तरफ जाइये। साथ में अच्छे रिजल्ट्स आपकी प्रतीक्षा कर रहे हैं। उनके साथ में इस महीने को लगातार आगे बढ़ाने की ओर आप चलते चले जाएं। एक्सपेंसेज की ओर थोड़ा सा अधिक ध्यान दीजियेगा। बीमारियां आती है आपके एक्सपेसेंज को बढ़ाने का कार्य कर सकती है। उसकी भी रोकथाम बड़े ही अच्छे से हमें करनी चाहिए। तो ये था वृषभ राशि वाले जातकों के लिए एक समग्र चिंतन। जो आपके सामने प्रस्तुत था। मैं अब वार्षिक राशिफल के साथ में भी आपके सामने बड़ा ही जल्दी ही उपस्थित होने वाला हूं जिसे हम पूरे वर्ष की हमारी जो भी परियोजनाएं है जो प्लानिंगस है और उन्हें हम कैसे एक्जूक्यूट कर सकते हैं उसकी तरफ भी मैं जाऊंगा। और साथ में एक विशेष कड़ी लेकर आऊंगा कि हमें राशि अनुसार किसी तरह के रिसोल्यूशन हमारे जिंदगी में पारित करने चाहिए। मन के भीतर भी एक संसद है। जो लगातार कोहराम मचाए रखती है हमारे भीतर ही भीतर। उससे आजाद होने की आवश्यकता है और उसे भी व्यवस्थित करने की आवश्यकता है। जो भी यूथ मुझे मिलता है मैं उन्हें हमेशा कहता हूं कि आप जब ये मान चुके कि मेरे भीतर कुछ यूनिक है तो फिर एक ऐसे इयरफोन अपने कान में लगा दीजिये जो सिर्फ और सिर्फ खुद की आवाज ही आप तक पहुंचने देगा। दूसरी कोई भी आवाज आप तक नहीं पहुंचने देगा। इफ यू हैव दैट काइंड एबिलिटि दैन यू हैव टू गो थ्रू दैट काइंड ऑफ ओपरचयूनिटी प्लेस। वो सारी जगह आपका इंतजार कर रही है, जहां आप पहुंच सकते हैं। सिर्फ और सिर्फ जरूरत है खुद के घेरे से बाहर निकल कर आजाद होने की। और लगातार आगे बढऩे की। तो इसी तरह आगे बढ़ते रहिये। हमारा साथ और संबंध यूं ही लगातार जुड़ता चला जाएगा। हम चर्चाएं करते चले जाएंगे और जीवन के जो प्रतिबिम्ब है उसे सामने लाने की कोशिश करते रहेंगे।
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