
नमस्कार। नीलम रत्न जिसे हमें Sapphire के नाम से भी जानते हैं। शनि जनित व्याधियों से जब भी कोई जातक पीडि़त होता है तो उसे नीलम पहनने की सलाह दी जाती है। मैं आपको यहां अनुसंधान और अनुभव के आधार पर एक बात कहना चाहता हूं कि जब भी आप नीलम धारण करें तो कुण्डली के 12 भावों के मध्य शनि की स्थिति को अच्छे से जांच लेना चाहिये, परख लेना चाहिये यदि शनि कमजोर पोजिशन में हों तब ही आप नीलम धारण करें। ढैय्या, साढ़े साती या फिर कमजोर बैठे हुए शनि की जब दशा आ रही है उस स्थिति में ही नीलम धारण करना चाहिए। क्योंकि दूसरे सारे ग्रहों के जो रत्न तो आपको पोजिटिव Effect दिखाते हैं या फिर सब Approch की तरफ व्यक्ति को चलाते रहते हैं, लेकिन जब भी व्यक्ति नीलम पहनता है तो या तो पोजिटिव रिजल्ट मिलेंगे या नेगेटिव रिजल्ट मिलेंगे यदि आपको शूट कर गया यानि कि शनि वाकई कमजोर पोजिशन में थे तो वो अपने हिसाब से पोजिटिव रिजल्ट देगा, लेकिन यदि पहले से शनि अच्छी पोजिशन में बैठे हुए हैं और आपने इनका रत्न धारण कर लिया तो हो सकता है नेगेटिव रिजल्ट भी मिलना शुरू हो जाए। इसलिए एक बार अच्छे से जांचें, परखें और उसके बाद में ही नीलम धारण करने की ओर जाएं। शनि जनित जो भी व्याधियां हैं, रोग हैं। यदि आप उनसे दो-चार हैं तो कुंडली की जांच करवाएं और उसके बाद में नीलम धारण कर लेना चाहिए। नीलम जो कि मोरपंख के रंग का ही होता है। आप मोरपंख का जब रंग देखते हैं और नीलम का जब रंग देखते हैं तो स्ड्डद्वद्ग होता है। इसका अर्थ वो खरा है। आप यदि कोई पानी की गिलास के भीतर नीलम को डाल देते हैं तो हल्की-सी नीली झांई सूर्य की किरणों के समक्ष आने पर निकलने लगती है तो इसका अर्थ भी यही है कि नीलम बिलकुल खरा है। अब आपने नीलम पहन रखा था उसका प्रभाव क्षीण हो चुका है, उसमें न्यूनता आ रखी है। पहले आपने पंडितजी से अभिमंत्रित करवाया था, उसके बाद में धारण किया था अब इतने अच्छे रिजल्ट नहीं दे रहा। आपको लगता है कि नीलम चेंज कर लेना चाहिए तो आप चेंज करने की ओर नहीं जाएं। सबसे पहले जो मैं आपको विधि चार्ज करने की बता रहा हूं उस तरफ आप जाएं और उसके बाद में नीलम धारण करें। भले ही आपने पहन रखा था अभिमंत्रित करवा कर तब भी आप उसे चार्ज कर सकते हैं या फिर आप नीलम लेकर आए हैं उसकी अंगूठी बनवा दी है और खुद ही अभिमंत्रित करना चाहते हैं तो उसका भी तरीका मैं आपको बता रहा हूं दोनों ही सेम ही है। शुक्रवार के दिन सुबह तिल्ली के तेल में आपको शनि रत्न की अंगूठी है यानि की नीलम जडि़त जो अंगूठी है इसे तिल्ली के तेल में डाल दीजिये आधी से अधिक कटोरी तिल्ली का तेल उसमें भर दीजिये और फिर अंगूठी को उसमें डुबो दीजिये। अगले दिन स्नानादि आदि से निवृत्त होने के बाद में सुबह-सुबह शनिवार को आपको ये अंगूठी अच्छे धो देनी है। एक नीला कपड़ा लीजिये। नीले कपड़े के ऊपर ये नीलम की अंगूठी रख दीजिये और उसके बाद 23 माला शनि का जो बीज मंत्र है ऊँ शन: शनैच्चराय नम: इसका जाप करें और उसके बाद इस अंगूठी को फिर से आपको धारण कर लेना चाहिए। फिर से वैसे ही प्रभाव उत्पन्न होने लगते हैं और वैसा ही इफेक्ट नीलम का आपके सामने आना शुरू हो जाता है। तो इस प्रभाव के द्वारा अब यहां एक प्रश्न और खड़ा होता है उसको मैं स्किप कर गया। ये जो तेल बचता है आपको इसे किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति को दान दे देना चाहिए। ये सबसे अच्छा तरीका है। आप इस माध्यम से जब भी नीलम पहनते हैं तो बड़े ही अच्छे रिजल्ट देने वाला होता है। समय-दर-समय, साल से सवा साल के भीतर आपको नीलम इस तरह चार्ज करते रहना चाहिए। कभी आप किसी फिनूरल से लौटें तभी भी आप इस रत्न को इस तरह चार्ज कर सकते हैं। तो ये थी शनि जनित रत्न के बारे में चार्ज करने की व्यवस्था। इस तरह से आप चार्ज करें और शनि जनित जो भी व्याधियां उनसे मुक्त हों। ऐसी ही मेरी कामना है।
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