
मार्ग शीर्ष मास में मेष राशि वाले जातकों के लिए प्रभाव कैसा रहेगा। गीता के 10वें अध्याय में अर्जुन श्रीकृष्ण से पूछते हैं कि आप अपने अद्भुत स्वरूप का वर्णन कीजिये जिससे में हृदयस्थ करूं। श्रीकृष्ण कहते हैं छंदों में मैं गायत्री हूं, विद्याओं में आध्यात्म विद्या हूं और मासों में मार्ग शीर्ष मास हूं। अद्भुत स्वरूप का वर्णन है वो हालांकि आध्यात्मिक चिंतन है जो कि हमें सम्पूर्णता की ओर अग्रसर करता है। आध्यात्म के भीतर अंदर की असीम शक्तियां छिपी हुई हैं। 24 नवम्बर से 22 दिसम्बर तक। चन्द्रमा प्रतीकात्मक तौर पर राशि स्थान में ही विराजित है जो लगातार स्थितियों को बदलते रहते हैं उनकी स्थितियों को परिवर्तित करके दिखाना संभव नहीं था। इसलिए राशि स्थान में ही विराजित बताया गया है। 4, 8 और 12 जब भी आते हैं तो उस समय का ध्यान रखना चाहिए। सूर्य अपनी संक्रांति को परिवर्तित कर चुके हैं तुला से निकलकर नीचस्थ स्थितियों से निकलकर वृश्चिक राशि में अपने मित्र की राशि में प्रवेश कर गए हैं। गुरु वहां पहले से विराजित। सूर्य के आवरणीय क्षेत्र में आ जाने की वजह से 7 दिसम्बर तक अस्तगत स्थितियों में रहेंगे। बुध भी यहीं अष्टम स्थान के अंदर मेष राशि वालों के लिए विराजित। लेकिन वक्री हो गए हैं और 6 दिसम्बर तक लगभग वक्री स्थितियों में रहेंगे। साथ-साथ यदि शनि की बात की जाए तो धनु राशि में ही राहू और केतु, कर्क और मकर राशि में विराजित। मंगल ने भी अपनी पोजीशन बदल कर यहां उच्च स्थितियों से निकलकर लाभ स्थान की ओर रुख किया है। शुक्र जो कि वक्री थे पहले अस्तगत है और अब उदित होकर मार्गीय स्थितियों के अंदर 16 नवम्बर को ही आ चुके हैं। सूर्य से विखंडित होकर उनका साथ छोड़ गए हैं। सूर्य आगे बढ़ गए वृश्चिक राशि के अंदर और शुक्र अब अपने मूलभूत प्रकृति के अनुसार अपनी ही राशि क्षेत्र के अंदर परिणाम दिखा पाएंगे। शिक्षा के हिसाब से देखें तो कारकाधिपति की बात करें साथ में यानि पंचम स्थान के कारकाधिपति होते हैं गुरु शिक्षा के। अष्टम स्थान में मंगल की राशि के अंदर इसके साथ में पंचमेश होकर सूर्य भी यहीं विराजित। पराक्रमेश और षष्टेश होकर भी बुध यहां वक्री स्थितियों के अंदर अब विराजित हो गए हैं। ये स्थिति शिक्षा के हिसाब से अच्छी नहीं कही जा सकती। दुगुनी मेहनत की आवश्यकता है। घबराएं नहीं। हम परिणाम की ओर जा रहे थे, लगातार अच्छी तैयारी चल रही थी, जो आपकी कुंडली का विश्लेषण हुआ उसके माध्यम से गोचरीय व्यवस्थाओं ने थोड़ा सा डिस्टरबेंस क्रियेट करने का कार्य किया तो हमें स्वास्थ्य के प्रति उस समय सावधान रहना चाहिए। और इसके साथ में जो पारिवारिक डिस्टरबेंस कई बार शिक्षा के समय ही इफेक्ट करते हैं तो हम यदि सावधानी के साथ चलें तो बेहतर परिणाम विपरीत पोजीशन में भी लेकर आ सकते हैं। सी.ए. के फील्ड से संबंधित है, एक्जाम की तरफ जा रहे हैं तो आपको बड़ी ही दुगुनी गति के साथ में मेहनत करनी पड़ेगी। बुध जो कि वाणिज्य के अधिपति होते हैं उनकी भी पोजीशन इस हैडन हाउस के अंदर बढिय़ा नहीं कही जा सकती। गुरु भी शिक्षा के कारकाधिपति होते हैं अष्टम स्थान के अंदर आ गए। सूर्य और चन्द्रमा जब भी अष्टमेश होते हैं तो अष्टम स्थान के दोष से मुक्त होते हैं, लेकिन यहां पर अष्टम स्थान के दोष से मुक्त नहीं है। इसलिए यह भी आपके रिफलेक्सेस को डाउन करने का कार्य करेंगे। ध्यान रखें। अष्टम में पोजीशन बढिय़ा नहीं। वैसे भी वाणिज्य के अधिपति होकर षष्टेश होकर बुध और साथ में पराक्रमेश होकर अष्टम स्थान के अंदर आ गए हैं तो इनकी पोजीशनिंग भी एक घर से 6-8 की और 3-11 की पोजीशन बन रही है। आपको अपनी मेहनत के अंदर दुगुने प्रभाव के साथ आगे बढऩा होगा। सूर्य उपासना के साथ विनायक के मंदिर में दर्शन करने के लिए भी जाएं। नकारात्मक स्थितियां हटने का कार्य करेगी। बिजनस की पोजीशन के अंदर में आप किसी एक्जस्टींग बिजनस में है तो शुक्र अपनी चमक बिलकुल एक अनोखे अंदाज के अंदर मार्गी होकर फ्रेशनेस एप्रोच के साथ यहां हैं। क्योंकि सूर्य आगे बढ़ चले हैं। राशि स्थान को भी देखने का कार्य करेंगे तो अपनी पोजीशन्स को बड़े ही इफेक्टिव एप्रोच के साथ में सामने लेकर आ पाएंगे। मंगल से दृष्टि संबंध यहां नहीं। शनि भी किसी भी पोजीशन के साथ में शुक्र को देखने का कार्य नहीं कर रहे हैं। यह काफी हद तक अच्छी स्थिति है। एक्जस्टिंग बिजनस वालों के लिए आपने कर्मशील रह कर मेहनत की भले ही कर्म स्थान के अंदर उच्चस्थ थे, लेकिन मंगल और केतु का यहां काम्बीनेशन था। ये आगे बढ़ गए हैं मंगल अपने इंटरेसिक रिजल्ट बड़े ही अच्छे तरीके से अग्रसर करेंगे। इस बिजनस के साथ न्यूनाधिक परेशानियां चल रही थी, वो एक हद तक दूर हटने का कार्य करेगी। यदि बिजनस को बढ़ाने की तरफ जाना चाहते हैं तो आप देखिये गुरु आपको इसके परमीशन और इजाजत सूर्य और बुध के साथ बैठकर कभी भी नहीं देंगे। क्योंकि गुरु थोड़ा सा रिस्क अवरजिव बनाते हैं आदमी को। ज्यादा सोच विचार और विश्लेषण के साथ में लेकर जाते हैं। बुध जब साथ में आकर बैठ जाएं तो ये स्थितियां थोड़ी सी और बढ़ जाती है। पांचवीं दृष्टि से द्वादश स्थान को देखने का कार्य किया। निरर्थक खर्चों के ऊपर रोक एक तरह से बनी रहेगी। सातवीं दृष्टि से लिक्विडिटि के हाउस को देखेंगे तो आपकी लिक्विडिटि को फ्लो को एक्सपोज बिलकुल भी नहीं होने देंगे। इस हिसाब से आपको अच्छे से ध्यान रखकर आगे चलना चाहिए। प्रेम प्रसंग के अंदर युवाओं में एक चार्मिंग विषय है। पुराने अफेयर्स वाली पोजीशन हो रखी है तो वो आपके सामने आ सकता है। क्योंकि पंचमेश होकर अष्टम स्थान के अंदर आ गए हैं सूर्य। साथ में मंगल भी एक दृष्टि एप्रोच के साथ में आपकी तरफ रहेंगे। क्योंकि यहां एकादश स्थान की ओर जाने का कार्य किया मंगल ने। यदि आप किसी ब्रेकअप वाली स्थिति में थे तो अब फिर से एक जुड़ाव वाली स्थितियां बन सकती हैं। अफेयर को बदलने वाली स्थिति में जाना चाहते हैं कोई मान-मनोवल वाली स्थितियों के अंदर है आप तो इसके लिए भी ये महीना काफी हद तक सही कहा जा सकता है। सूर्य जैसे प्रखर तेज वाले ग्रह गुरु के साथ में आकर विराजित। और बुध भी यहीं आकर विराजित। हैडन हाउसेस को कंट्रोल करने का कार्य भी किया है गुरु ने यहां बैठकर। अस्तगत स्थितियों के अंदर जरूर हैं लेकिन अपनी नैसर्गिक स्थिति को नहीं छोड़ेंगे। सर्विस क्लास वाले लोगों के लिए मंगल और केतु का यहां काम्बीनेशन बना हुआ था वह अलग हो चुका है। अब कर्म स्थान के अंदर उच्चस्थ बैठकर मंगल लाभ स्थान की ओर जा चुके हैं। लाभ मिलने की आपको प्रबल संभावनाएं रहेंगी। प्रमोशन अटक हुई थी तो वो भी अनुकूल होगी। पैसा अटका हुआ था तो मंगल चौथी दृष्टि से यहां लिक्विडिटि के हाउस को देखकर उसे भी फ्री करवाने के कार्य की ओर आपको लेकर चलेंगे। मंगल षष्ट स्थान को देखेंगे तो कोई रोग और शत्रु पनप रहे थे, इच्छाशक्ति की कमी थी तो वहां पर भी यह स्थिति सहायक। केतु यहां अकेले विराजित हैं। आपकी लग्न कुंडली के अनुसार दशाओं की स्थितियां देखते हैं वहां केतु अच्छी पोजीशन में है तो यह महीना आपके लिए नेम और फेम के हिसाब से श्रेष्ठतम परिणाम वाला कहा जा सकता है। किसी क्षेत्र में पराक्रम की जरूरत है तो अच्छे से बढ़ा नहीं पाएंगे। वाणी पर भी व्यक्ति को नियंत्रण रखना चाहिए। शुक्र अलग पोजीशन में आ गए। वाणी के स्थान से 6-8 का संबंध बना रहे हैं जो अलग। स्वराशि स्थितियों में बैठकर एक ठीकठाक पोजीशन का निर्माण करते हैं। अष्टम में बैठे बुध जो कि सूर्य के साथ बैठकर उनकी एप्रोच को भी आत्मसात करते हैं। कुटुम्बीजनों के साथ एक नियंत्रण की आवश्यकता। स्वच्छन्दता छोड़कर परिवार की स्थिति के अनुकूल आगे बढ़े तो अच्छा रहेगा। आध्यात्मिक चिंतन के साथ, उम्र के उस पड़ाव में है, उस स्थिति में शनि की पोजीशन बड़ी अच्छी कही जा सकती है। कुछ समय के लिए शनि अस्तगत स्थितियों में रहेंगे लगभग 16-17 तक। 18 जनवरी के बाद में फिर से उदित स्थितियों में आएंगे। कारण एक ही जैसे जैसे सूर्य अपनी पोजीशन बदल रहे हैं। सबसे पहले शुक्र को अस्तगत करने का कार्य किया अब गुरु को तो उन्हें भी अस्तगत स्थितियों में लाएंगे। सूर्य का प्रभाव क्षेत्र आवरणीय क्षेत्र भी कुछ ऐसा ही है। बाद में इनकी संक्रांति से निकलकर मकर में प्रवेश कर जाएंगे। रोग की दृष्टि में संभलकर और सावधान रहने की आवश्यकता है। आठवीं तापीय दृष्टि से षष्ट स्थान को देखने का कार्य कर किया मंगल ने। ब्लड प्रेशर आदि से जुड़े लोग उन्हें भी ध्यान रखने की आवश्यकता। षष्टेश होकर बुध अष्टम स्थान के अंदर होने से स्नायु या थाइराइड संबंधी रोग है उनमें भी कंट्रोल्ड एप्रोच की संभावना कम रहती है। ध्यान रखें। मौसम बदलाव में डाइजेस्ट प्रबोलम भी हो सकती है। ध्यान रखें। केतु यहां बैठे होंगे जो कि ड्रेगन टेल है अलग पोजीशन के अंदर सातवें स्थान के अंदर रहते हैं। यहां केतु कई बार बैठकर निरर्थक भ्रमणशील भी रखते हैं। सावधानी रखें।
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