
नमस्कार। देव गुरु वृहस्पति का मुख्य रत्न है पुखराज जिसे हमें अंग्रेजी में गोपास पुष्पराज के नाम से जानते हैं। जब भी व्यक्ति गुरु जनित परेशानियों से दो-चार होता है यानि कि यदि गुरु भाग्येश है और कमजोर पोजिशन में बैठे हुए हैं, बच्चे को शिक्षा में दिक्कत आ रही है, संतान प्राप्ति में महिला को दिक्कत आ रही है, गर्भाधान वाली पोजिशन तक महिला पहुंची नहीं पा रही है और इसके अलावा पेट संबंधी दिक्कतें हैं, मोटापे से कोई व्यक्ति परेशान है, लीवर संबंधी परेशानियों से जूझना पड़ रहा है ऐसी पोजिशन में पुखराज पहनने की सलाह दी जाती है तो जब भी व्यक्ति पुखराज पहनता है तो एक बात का ध्यान रखना चाहिए कि सबसे पहले उसकी जांच कर लें कि वो खरा है या नहीं। आप यदि गाय के दूध में चौबीस घंटे तक पुखराज को रखकर देखते हैं और उसकी चमक वैसे ही बरकरार रहे उन चौबीस घंटों के बाद भी तो आपको समझ लेना चाहिए कि ये नग बिलकुल खरा है। ये तो रही एक बात। अब जब भी आप पुखराज पहनते हैं तो इन्सीयल स्टेज के ऊपर कुछ महीनों में वो आपके वेट गेन की ओर बहुत अधिक तत्पर लेकर जाते हैं इससे आपको सावधान रहना चाहिए, एक्स्ट्रा कांसियस रहना चाहिये जिससे कि अत्यधिक मोटापे वाले पोजिशन से आप बच सकें। लेकिन गुरु कमजोर पोजिशन में है तो पुखराज पहनना भी अत्यधिक आवश्यक है। अब कई बार मैं ये देखता हूं कि लोग पुखराज धारण कर लेते हैं पण्डितजी के द्वारा उसे अभिमंत्रित करवाते हैं, लेकिन कुछ समय बाद उसका प्रभाव क्षीण होते हुए देखते हैं उसमें न्यूनता आती हुई देखते हैं। उस समय उन्हें फिर से कैसे चार्ज किया जाए, अभिमंत्रित किया जाए, हर 6-8 महीनों के भीतर तो पंडित जी के पास जाया नहीं जा सकता न ही अंगूठी कि साहब इसे फिर से अभिमंत्रित कर दीजिये। मैं आपको एक सर्वसुलभ तरीका बता रहा हूं जिसके द्वारा आप इस रत्नजडि़त अंगूठी को खुद ही चार्ज कर सकते हैं। सर्वप्रथम आपको सोमवार के दिन इस रत्नजडि़त अंगूठी को चने की दाल में 250 ग्राम चने की दाल लीजिये और उस चने की दाल के भीतर 24 घंटे के लिए यानि सोमवार की सुबह से मंगलवार की सुबह तक इस अंगूठी को चने की दाल के भीतर रहने दीजिये। अगले दिन सरसों के तेल में एक छोटी कटोरी लीजिये उसमें सरसों का तेल डालकर इस अंगूठी को 24 घंटे के लिए यानि कि मंगलवार की सुबह से बुधवार की सुबह तक उसके भीतर रख दीजिये और बुधवार की सुबह से गुरुवार की सुबह तक चन्दन और केशर के पाउडर के मध्य इस अंगूठी को रख देना चाहिये। गुरुवार की सुबह-सुबह स्नानादि से निवृत्त होने के बाद में आप एक पीला कपड़ा बिछाएं उसके ऊपर पीले चावल रखें जो अक्षत होते हैं उन्हें पीले रंग में हल्दी में करके उन्हें उस कपड़े के ऊपर रख देना चाहिए। उसके बाद पीले पुष्प, हजारे के पुष्प हो तो बहुत ही बेहतर। उनके ऊपर इस तरह रत्नजडि़त अंगूठी को रख दीजिये- ऊँ ब्रह्म वृहस्पते नम: मंत्र की 16 मालाओं का आपको जाप करना चाहिए इससे ये अंगूठी अभिमंत्रित होने लगती है फिर से चार्ज होने लगती है और फिर दोपहर के समय में आप जब अभिजीत मुहूर्त होता है तो इस अंगूठी को धारण कर लेना चाहिए। जब भी आपका इसका प्रभाव न्यून होता हुआ देखें, पुखराज में जब भी अपने जीवन में न्यून होता हुआ देखें कम होता हुआ देखा तो इस प्रोसेस को दोहराएं और इस अंगूठी को फिर से धारण करें। रत्न को चेंज नहीं चार्ज करने की आवश्यकता होती है और यदि बारम्बार समय-दर-समय रत्न चार्ज होते चले जाएं तो हमारे जीवन पर भी बड़े ही अच्छे प्रभाव दिखाने वाले होते हैं। तो इस तरह आप यदि गुरु जनित व्याधियों से परेशान हैं तो पुखराज धारण कीजिये और समय-दर-समय चार्ज करते चले जाइये।
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