भगवान शिव की आराधना के लिए वैसे तो कोई विशेष पर्व-उत्सव की आवश्यकता नहीं। क्योंकि शिव नाम से ही भोलेशंकर हैं और नियमपूर्वक उपासना करने पर शीघ्र प्रसन्न होने वाले भी हैं। फिर भी,
मास शिवरात्रि का पर्व हर माह के कृष्णपक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन शिवजी और माता पार्वती कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते हैं। पंचांग के अनुसार
इस साल शिव चतुर्दशी 4 जनवरी, 2019 शुक्रवार को प्रात: 4 बजकर 41 मिनट से प्रारंभ हो रही है जो पूरे दिन से रात्रि 4 बजे तक रहेगी।
स्कंदपुराण के अनुसार पौष माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को उपवास किया जाता है, इस तिथि को सर्वोत्तम माना गया है।
गरुड़ पुराण के अनुसार मास शिवरात्रि से एक दिन पूर्व त्रयोदशी तिथि में भगवान शिव की पूजा की जाती है और व्रत का संकल्प लिया जाता है। इसके बाद चतुर्दशी तिथि को अन्न-जल ग्रहण किए बिना रहकर शिव आराधना की जाती है और पूरे दिन निराहर रहने के बाद शाम को व्रत पारण किया जाता है।
शिव पुराण में शिव को सांसारिक सुख का आधार माना गया है। शास्त्रों के अनुसार सांसारिक इच्छाओं में धन, संपदा और भौतिक सुखों को एकत्र करने का भाव आता है। जिसे पूरा करने हेतु मनुष्य धार्मिक उपायों का सहारा लेता है। शास्त्रीय मान्यता है कि मास महाशिवरात्रि का व्रत सभी सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति के लिए अत्यंत लाभकारी होता है। इस मास महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए व्रत और पूजन करना बहुत ही लाभदायक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि जो भी जातक इस दिन शिव का व्रत रखता है शिवजी उसके सभी कष्ट हर लेते हैं। इतना ही नहीं पौष मास में आध्यात्मिकता की प्रबलता के कारण इस माह की चतुर्दशी को शिव-पूजन करने से भक्तों को भगवान शिव से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है।
पूजा-अर्चनामास शिवरात्रि के दिन शिवजी का जलाभिषेक करना शुभ माना जाता है। मास शिवरात्रि के इस दिन शिवजी की प्रतिमा या शिवलिंग को पंचामृत से स्नान कराकर ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जाप करना चाहिए। भगवान शिवजी की विशेष मास शिवरात्रि को जागरण किया जाता है और अगले दिन प्रात: काल में ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा देकर व्रत का पारण किया जाता है। गरुड़ पुराण के अनुसार मास शिवरात्रि के दिन शिवजी को बिल्वपत्र अर्पित किया जाता है। भगवान शिव को बिल्व पत्र बहुत प्रिय होते हैं। शिवपुराण के अनुसार शिवजी को रुद्राक्ष, बिल्व पत्र, भांग, शिवलिंग और काशी नगरी अत्यंत ही प्रिय हैं।
मास शिवरात्रि के दिन दाम्पत्य जीवन में प्रवेश करने वालों को व्रत पूजन करना चाहिए। जिस किसी का भी विवाह में विलंब हो रहा है या किसी दोष के कारण विवाह नहीं हो पा रहा हो, उन्हें भी यह व्रत और पूजन करना चाहिए। और जिस किसी का वैवाहिक जीवन में उतार-चढ़ाव बना रहता है या वैवाहिक जीवन सुखमय नहीं बीत रहा है, उन्हें भी इस दिन व्रत और पूजन करना हितकर होता है। साथ ही जो लोग पूरे परिवार को सम्पन्न-सुखी देखना चाहते हैं उन्हें भी शिव का व्रत और पूजन करना चाहिए।
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