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नवरात्रि में पाएं आर्थिक समृद्धि

हिन्दू धर्म में नवरात्रि को बहुत ही अहम माना गया है। भक्त नौ दिनों तक व्रत रखते हैं और देवी मां की पूजा करते हैं। साल में कुल चार नवरात्रि पड़ती है और ये सभी ऋतु परिवर्तन के संकेत होते हैं। या यूं कहें कि ये सभी ऋतु परिवर्तन के दौरान मनाए जाते हैं। सामान्यत: लोग दो ही नवरात्र के बारे में जानते हैं। इनमें पहला वासंतिक नवरात्र है, जो कि चैत्र में आता है। जबकि दूसरा शारदीय नवरात्र है, जो कि आश्विन माह में आता है। हालांकि इसके अलावा भी दो नवरात्र आते हैं जिन्हें गुप्त नवरात्र कहा जाता है। नवरात्र के बारे में कई ग्रंथों में लिखा गया है और इसका महत्व भी बताया गया है। इस बार आषाढ़ मास में गुप्त नवरात्रि की शुरुआत हो रही है। यह अंग्रेजी महीनों के मुताबिक 3 जुलाई से 10 जुलाई तक चलेगा। इन दिनों में तांत्रिक प्रयोगों का फल मिलता है, विशेषकर धन प्रात्ति के रास्ते खुलते हैं। धन प्रात्ति के लिए नियमपूर्वक-विधि विधान से की गई आराधना अवश्य ही फलदायी सिद्ध होती है। नौकरी-पेशे वाले धन प्रात्ति के लिए ऐसे करें पूजा-अर्चना- गुप्त नवरात्रि में लाल आसन पर बैठकर मां की आराधना करें।  मां को लाल कपड़े में...

रावण कई श्रापों से ग्रस्त था!

रावण राक्षस तो था ही उसे त्रेता युग का सबसे हीन प्राणी भी कहा जाता है। साथ ही रावण पंडित, ज्ञानी और अस्त्र-शस्त्रों का जानकार भी था। रावण ने अपने जीवनकाल में कई युद्ध किए, उसने सभी में विजय प्राप्त की। लेकिन भगवान श्रीराम से वह युद्ध हार गया और उसका अंत हो गया। धर्मग्रंथों के अनुसार, रावण का अंत केवल श्रीराम की वजह से ही नहीं हुआ बल्कि शक्ति और ज्ञान पर घमंड के कारण कई लोगों का दिल दुखाने पर दिए श्राप का कारण भी था। रावण के अंत में कई लोगों का श्राप कारण बने, जिनकी वजह से राम के साथ युद्ध में मारा गया।
वाल्मिकि रामयण के अनुसार, रावण की कुदृष्टि सीता पर पूर्वजन्म में भी पड़ी थी। जिस कारण माता सीता ने रावण को श्राप दिया था कि उसकी वजह से ही रावण का अंत होगा। माता सीता के पूर्वजन्म का नाम वेदवती था, जो देवी लक्ष्मी के अंश से उत्पन्न हुई थीं।
शास्त्रों के अनुसार, एक बार रावण भगवान शंकर से मिलने कैलाश पर्वत पर गया था। उसने वहां भगवान के वाहन नंदीजी के स्वरूप की हंसी उड़ाई और बंदर जैसा मुंह वाला भी बताया था। तब नंदी ने रावण को श्राप देकर कहा था कि तेरा सर्वनाश बंदरों के कारण ही होगा।
भगवान राम के वंश (रघुवंश) में अनरण्य नाम का राजा थे। राजा अनरण्य का रावण के साथ भयंकर युद्ध हुआ था। इस युद्ध में अनरण्य राजा की मृत्यु हो गई। लेकिन मरने से पहले रावण को श्राप दिया था कि मेरे ही वंश का युवक तुम्हारी मृत्यु का कारण बनेगा।
रावण ने स्वर्ग में अपने भाई कुबेर के बेटे नल कुबरे की होने वाली पत्नी अप्सरा रंभा को अपनी वासना के लिए पकड़ लिया। तब अप्सरा ने कहा था कि मैं आपकी पुत्रवधू के समान हूं लेकिन रावण नहीं माना। उसने रंभा के साथ दुराचार किया। इस बात की जानकारी जब नलकुबेर को मिली तब उसने रावण को श्राप दिया कि तुम्हारी मृत्यु एक स्त्री के कारण होगी और तुम्हारे मस्तक के सौ टुकड़े होंगे।
रावण की बहन शूर्पणखा अपने पति विघुतजिव्ह से बहुत प्रेम करती थी। विघुतजिव्ह राजा कालकेय का सेनापति था। रावण का कालकेय के साथ युद्ध हुआ था, उस युद्ध में रावण ने विघुतजिव्ह का वध कर दिया। तब शूर्पणखा ने रावण को श्राप दिया था कि मैं तुम्हारी मृत्यु का कारण बनूंगी।
रावण ने अपनी पत्नी की बड़ी बहन माया का भी वासनायुक्त होकर सतीत्व भंग करने की कोशिश की थी। इस बात की जानकारी जब माया के पति वैजयंतपुर के शंभर राजा को मिली थी। तब शंभर ने रावण को बंदी बनाकर जेल में डाल दिया था। तभी दशरथ ने वैजयंतपुर पर आक्रमण कर दिया और इस युद्ध में शंभर की मृत्यु हो गई। तब माया ने रावण को श्राप दिया कि तुमने मेरा सतित्व भंग करने का प्रयास किया, इस वजह मेरे पति की मृत्यु हो गई। तुम्हारी भी मृत्यु भी इसी वजह से होगी। इन्हीं श्रापों के चलते रावण ज्ञानी होते हुए भी 'विनाश काले विपरीत बुद्धि' का शिकार हो अंत में राम के साथ युद्ध में मारा गया।

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