चैत्र नवरात्रि के दौरान अनुष्ठान
बहुत भक्त नौ दिनों का उपवास रखते हैं। भक्त अपना दिन देवी की पूजा और नवरात्रि मंत्रों का जप करते हुए बिताते हैं।
चैत्र नवरात्रि के पहले तीन दिनों को ऊर्जा माँ दुर्गा को समर्पित है। अगले तीन दिन, धन की देवी, माँ लक्ष्मी को समर्पित है और आखिर के तीन दिन ज्ञान की देवी, माँ सरस्वती को समर्पित हैं। चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों में से प्रत्येक के पूजा अनुष्ठान अलग-अलग हैं, जिन्हें नियमपूर्वक इस प्रकार करना चाहिए।
पूजा विधि- घट स्थापना नवरात्रि के पहले दिन सबसे आवश्यक है, जो ब्रह्मांड का प्रतीक है और इसे पवित्र स्थान पर रखा जाता है, घर की शुद्धि और खुशाली के लिए।
1. अखण्ड ज्योति- नवरात्रि ज्योति घर और परिवार में शांति का प्रतीक है। इसलिए, यह जरूरी है कि आप नवरात्रि पूजा शुरू करने से पहले देसी घी का दीपक जलायें यह आपके घर की नकारात्मक ऊर्जा को कम करने में मदद करता है और भक्तों में मानसिक संतोष बढ़ाता है।
2. जौ की बुवाई- नवरात्रि में घर में जौ की बुवाई करते हैं। ऐसी मान्यता है की जौ इस सृष्टी की पहली फसल थी इसीलिए इसे हवन में भी चढ़ाया जाता है। वसंत ऋतु में आने वाली पहली फसल भी जौ ही है जिसे देवी माँ को चैत्र नवरात्रि के दौरान अर्पण करते हैं।
3. नव दिवस भोग (9 दिन के लिए प्रसाद)- प्रत्येक दिन एक देवी का प्रतिनिधित्व किया जाता है और प्रत्येक देवी को कुछ भेंट करने के साथ भोग चढ़ाया जाता है।
सभी नौ दिन देवी के लिए 9 प्रकार भोग है- 1. दिन- केले 2. दिन- देसी घी (गाय के दूध से बने) 3. दिन- नमकीन मक्खन 4. दिन- मिश्री 5. दिन- खीर या दूध 6. दिन- माल पुआ 7. दिन- शहद 8. दिन- गुड़ या नारियल 9. दिन- धान का हलवा।
4. दुर्गा सप्तशती- दुर्गा सप्तशती शांति, समृद्धि, धन और शांति का प्रतीक है, और नवरात्रि के 9 दिनों के दौरान दुर्गा सप्तशती के पाठ को करना, सबसे अधिक शुभ कार्य माना जाता है।
5. नौ देवियो के लिए नौ रंग- शुभकामना के लिए और प्रसन्नता के लिए, नवरात्रि के नौ दिनों के दौरान लोग नौ अलग-अलग रंग पहनते हैं- 1 दिन- हरा 2 दिन- नीला 3 दिन- लाल 4 दिन- नारंगी 5 दिन- पीला 6 दिन- नीला 7 दिन- बैंगनी रंग 8 दिन- गुलाबी 9 दिन- सुनहरा रंग।
6. कन्या पूजन- कन्या पूजन माँ दुर्गा की प्रतिनिधियों (कन्या) की प्रशंसा करके, उन्हें विदा करने की विधि है। उन्हें फूल, इलायची, फल, सुपारी, मिठाई, श्रृंगार की वस्तुएं, कपड़े, घर का भोजन (खासकर- जैसे की हलवा, काले चने और पूरी) प्रस्तुत करने की प्रथा है।
अनुष्ठान के कुछ विशेष नियम -
1. प्रार्थना और उपवास- चैत्र नवरात्रि समारोह का प्रतीक है। त्योहार के आरंभ होने से पहले, अपने घर में देवी का स्वागत करने के लिए घर की साफ सफाई करते हैं।
2. सात्विक जीवन व्यतीत करते हैं। भूमि शयन करते हैं। सात्त्विक आहार करते हैं।
3. उपवास करते वक्त सात्विक भोजन जैसे कि आलू, कुट्टू का आटा, दही, फल, आदि खाते हैं।
4. नवरात्रि के दौरान, भोजन में सख्त समय का अनुशासन बनाए रखते हैं और अपने व्यवहार की निगरानी भी करते हैं, जैसे की
अस्वास्थ्यकर खाना नहीं खाते।
- सत्संग करते हैं।
- ज्ञान सूत्र से जुड़ते हैं।
- ध्यान करते हैं।
- चमड़े का प्रयोग नहीं करते हैं।
- क्रोध से बचे रहते हैं।
- कम से कम 2 घंटे का मौन रहते हैं।
- अनुष्ठान समापन पर क्षमा प्रार्थना का विधान है तथा विसर्जन करते हैं।
चैत्र नवरात्री का महत्व- यह माना जाता है कि यदि भक्त बिना किसी इच्छा की पूर्ति के लिए महादुर्गा की पूजा करते हैं, तो वे मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर कर मोक्ष प्राप्त करते हैं।
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